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इस सरकारी अस्पताल में लगेगा AI-स्मार्ट बेड, मरीज की हालत बिगड़ने से 2 घंटे पहले डॉक्टर-नर्स के फोन पर बजा देगा अलार्म

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Mar 21, 2026 08:32 am IST,  Updated : Mar 21, 2026 08:32 am IST

Kanpur Hospital AI beds: कानपुर के सरकारी अस्पातल में AI से लैस बेड लगाने की तैयारी है। ये स्मार्ट बेड मरीज की धड़कन और हर छोटे मूवमेंट की निगरानी के जरिए हालत बिगड़ने से पहले ही डॉक्टर और नर्स को अलर्ट भेज देंगे।

Kanpur Hospital AI beds- India TV Hindi
AI बेड से मरीजों को मिलने वाले इलाज की क्वालिटी में सुधार होगा। Image Source : PEXELS (प्रतीकात्मक फोटो)

AI Bed In Hospitals: यूपी के कानपुर के प्रतिष्ठित गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज और संबद्ध हैलट अस्पताल में अब मरीजों की निगरानी पूरी तरह हाई-टेक और AI आधारित होगी। अस्पताल प्रशासन ने AI-पावर्ड मैट्रेस यानी'स्मार्ट बेड' लगाने की तैयारी पूरी कर ली है। ये विशेष बेड मरीज की हालत गंभीर होने से कई घंटे पहले ही अलर्ट जारी कर देंगे, जिससे डॉक्टर और नर्स समय रहते पहुंचकर जान बचाने में सक्षम होंगे। यह उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में AI तकनीक का एक बड़ा और पहला कदम माना जा रहा है।

अस्पताल में लगाए जाएंगे 30 AI-स्मार्ट बेड

प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने बताया कि अस्पताल में दो नए वार्ड तैयार किए गए हैं, जहां शुरुआती चरण में कम से कम 30 बेड्स को इन AI-स्मार्ट मैट्रेस से लैस किया जाएगा। ये बेड 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं और CSR फंड के माध्यम से इन्हें लगाया जा रहा है। हर स्मार्ट बेड की कीमत लगभग 5 लाख रुपये बताई जा रही है। ये बेड मैट्रेस के नीचे लगे पतले सेंसर शीट के जरिए काम करते हैं, जो बैलिस्टोकार्डियोग्राफी (Ballistocardiography) तकनीक से शरीर की सूक्ष्म कंपनों को पकड़ते हैं, जैसे हर धड़कन, सांस और बॉडी मूवमेंट। AI एल्गोरिदम इन डेटा को प्रोसेस करके हार्ट रेट, रेस्पिरेशन रेट, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन सैचुरेशन और अन्य महत्वपूर्ण विटल साइन्स की निरंतर मॉनिटरिंग करता है।

AI मैट्रेस यूं करेगा मरीजों की निगरानी

अस्पताल में अक्सर 'कोड ब्लू' की स्थिति आती है, जब मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाती है और सीपीआर जैसी आपात स्थिति बनती है। ऐसी स्थिति में सफलता दर सिर्फ 50 फीसदी तक रहती है, क्योंकि कई बार डॉक्टर या स्टाफ पहुंचने से पहले ही मरीज की जान चली जाती है। लेकिन इन स्मार्ट बेड्स से स्थिति बदल जाएगी। अगर मरीज के विटल पैरामीटर्स में कोई असामान्य बदलाव आता है, जैसे ब्लड प्रेशर गिरना या धड़कन अनियमित होना तो डॉक्टर और नर्स के मोबाइल, टैबलेट पर तुरंत 'रेड लाइन' अलर्ट और अलार्म बज जाएगा। यह अलर्ट 2 घंटे या इससे अधिक पहले भी आ सकता है, जिससे समय पर इंटरवेंशन संभव हो जाएगा।

नर्सिंग स्टाफ पर कम होगा बोझ

यह तकनीक फिलहाल कुछ बड़े प्राइवेट अस्पतालों में इस्तेमाल हो रही है, लेकिन सरकारी क्षेत्र में GSVM इसे अपनाकर एक मिसाल कायम करने जा रहा है। ये बेड पल-पल की रिपोर्ट जेनरेट करते हैं, जिससे हर समय एक अटेंडेंट या डॉक्टर के पास रहने की जरूरत कम हो जाती है। इससे नर्सिंग स्टाफ पर बोझ कम होगा और मरीजों को बेहतर देखभाल मिलेगी। 

गंभीर बीमारी के मरीजों को मिलेगा उचित इलाज

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. काला ने कहा कि मुख्य लक्ष्य अनावश्यक मौतों को रोकना है। इस तकनीक से 'कोड ब्लू' की घटनाएं काफी कम होंगी और गंभीर मरीजों को समय पर उचित इलाज मिल सकेगा।

बढ़ेगी मरीज की जान बचाने की संभावना

भविष्य में इन वार्डों को और अपग्रेड किया जाने की भी तैयारियों पर मंथन चल रहा है। ऐसे में भविष्य में जैसे-जैसे नई AI सुविधाएं आएंगी, बेड्स को और स्मार्ट बनाया जाएगा। GSVM प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल इलाज की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि सरकारी अस्पतालों में हाई-टेक स्वास्थ्य सेवाओं की नई शुरुआत भी करेगा। आम मरीजों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी, क्योंकि अब मौत के मुंह में जाने से पहले ही अलर्ट मिलेगा और जान बचाने की संभावना बढ़ जाएगी।

(इनपुट- अनुराग श्रीवास्तव)

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